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आओ हाथ बढाएं.......
मित्रों, मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्‍तंभ है। इसके बिना लोकतंत्र की कल्‍पना बेमानी है। स्‍वस्‍थ लोकतंत्र के लिए निर्भीक और ईमानदार मीडिया का होना जरूरी है। हमारे देश की लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था सातवें दशक में प्रवेश कर चुकी है। इसके पीछे सबसे अहम रोल मीडिया का ही है, जो समय-समय पर जनता को जागरूक करती रही। लेकिन सामयिक प्रदूषण खासकर ग्‍लोबलाइजेशन के चलते लोकतंत्र के इस चौथे स्‍तंभ का अस्तित्‍व अब खतरे में है। समाज की जिन बुराइयों और चुनौतियों से लड़ने के लिए मीडिया बनी आज खुद उन्‍हीं बुराइयों से ग्रसित होती जा रही है। ऐसे हालात में लोकतंत्र या यूं कहें कि हमारे देश का भविष्‍य खतरे में है। लेकिन ऐसा हम होने नहीं देंगे, इसी संकल्‍प के साथ कुछ वर्ष पूर्व जनसत्‍ता एक्‍सप्रेस की स्‍थापना की थी। जो कुछ था उससे जनसत्‍ता एक्‍सप्रेस रूपी हथियार की व्‍यवस्‍था कर निकल पड़ा मैदान-ए-जंग में आसुरी शक्तियों से लड़ने। इस शुचिता संग्राम में कई ऐसे अवसर आये जब आवश्‍यक संसाधनों के अभाव में खुद को असहाय महसूस करने लगा। मन टूट गया, संकल्प पहाड़ सा नजर आने लगा। इतने बड़े पहाड़ को तोड़ने का संकल्प लेना बुझदिली समझ में आने लगी। ऐसे हालात में फरिश्ता बनकर मित्रों और शुभचिंतकों ने संभाला। उनकी हौसलाफजाई और सहयोग से मिले नवजीवन ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को पवित्र रखने के संकल्प को नयी ताजगी दी। जिसके परिणाम स्वरूप मीडिया जगत के इतिहास में जुड़ने जा रहे कई पन्नों को काला होने से बचाया।
मेरी आज तक की इस संघर्ष यात्रा का परिणाम आप सबके सामने है। जनसत्ता एक्सप्रेस मीडिया की शुचिता के अभियान से आगे बढ़कर एक आंदोलन का रूप ले चुका है। आंदोलन रूपी इस व्यापकता के चलते हमारी चुनौतियां बड़ी व्यापक हो गयी हैं। मीडिया को वेश्या का रूप देने पर तुली आसुरी शक्तियां अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान जनसत्ता एक्सप्रेस पर पूरी ताकत से हमला शुरू कर दी हैं। हम तोप के सामने लाठी लेकर खड़े हैं सिर्फ अपने संकल्प के साथ। इस लड़ाई में मेरी हश्र जो भी हो, शायद मैं मिट जाऊं, लेकिन संकल्प अटल है, न झुकेंगे और न टूटेंगे। मीडिया की शुचिता और लोकतंत्र बचाने का यह मेरा नहीं आप सबका आंदोलन है। इसमे विजय भी प्राप्त करेंगे, यह पूरा विश्वास है। विश्वास सिर्फ खुद के नहीं आप सबके चलते है। मीडिया को समाप्त करने पर तुली शक्तियों के नये पैतरों का मुकाबला करने के लिए आपका साथ जरूरी है। तोप का मुकाबला लाठी से नहीं बल्कि तोप से होगा और हम देंगे मुंहतोड़ जवाब। इस विश्वास के साथ हम आग्रह करते हैं आपसे सहयोग का और सौंपते हैं आपको कमान ताकि चलता रहे जनसत्ता एक्सप्रेस रूपी आंदोलन। आपका तन और मन मेरे साथ था, अब जरूरत है धन की। इसके लिए फैलाता हूं आपके सामने मीडिया की शुचिता की चादर।
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कुमार सतीश, संपादक (जनसत्ता एक्सप्रेस)
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